गुरुवार, १४ मे, २०१५

maitri

मैत्री की कोई सीमा नहीं होती 
वह मुक्त होती है.
दो बिलकुल अलग अलग किस्म के व्यक्ति 
मित्र हो जाते हैं 
क्यों की वह एक दूसरे को सहते हैं.
अनुशासित सुंदरता कुछही समय तक 
आँखों को सुहाती है.
जैसे की सेना की परेड।
हमेशा तो प्रकृति ही सुन्दर दीखती  है
जिसमें है मुक्त पवन, छोटे बड़े पहाड़ ,
फैले हुए मैदान, रेगिस्तान 
घास के तिनकों से लेकर बड़े बड़े वृक्ष 
नाना प्रकार के जीव जंतु और जानवर।
वैसेही मैत्री प्रकृति है 
मानवीय संबंधों का मधुर संगीत है 
जिसमें रिश्तों का बंधन नहीं 
अपेक्षाएं नहीं
एक दूसरे को बुरा भला कहने की 
पूरी स्वतंत्रता है 
एक दूसरे के कंधे पर चढाने का 
पूरा अधिकार है। 
तो मित्र बनो 
रिश्ते मत जोड़ो। 
और सबसे अच्छा मित्र होता है 
उपरवाला 
चढ़ जाओ उसके कंधेपर 
पार लग जाओगे 
बस, कभी हाथ ढीले मत करना 
नहीं तो गिर जाओगे. 


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